मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मकता, नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है। इसी शुभ अवसर पर 15 जनवरी को होटल रिवरव्यू में एक भव्य खिचड़ी पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के गणमान्य लोगों ने सहभागिता कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

इस विशेष आयोजन के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद श्री श्याम सिंह यादव रहे, जिन्हें होटल रिवरव्यू के मालिक डॉ. के. पी. यादव द्वारा विशेष आमंत्रण दिया गया था। डॉ. के. पी. यादव ने अपने आतिथ्य भाव से सभी आगंतुकों का स्वागत कर भारतीय “अतिथि देवो भवः” परंपरा को सजीव कर दिया।
इस अवसर पर विकेश उपाध्याय, डॉ. आर. पी. यादव, डॉ. बी. के. यादव, डॉ. एस. के. यादव, वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मी यादव, होटल मैनेजर अमित कुमार, साथ ही शरीक, मनोज मौर्य, आलोक यादव, शशिभूषण यादव, जावेद, शिवशहाय यादव, जनार्दन यादव, केशु आदि सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों को पारंपरिक खिचड़ी, तिल-गुड़ और अन्य व्यंजनों से सम्मानित किया गया।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का विशेष महत्व है। यह केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। होटल रिवरव्यू में आयोजित यह खिचड़ी पार्टी केवल एक भोज नहीं थी, बल्कि भावनाओं का संगम थी, जहाँ हर व्यक्ति के चेहरे पर खुशी, अपनापन और उत्सव की झलक साफ दिखाई दे रही थी।
कार्यक्रम के दौरान लोहड़ी और मकर संक्रांति दोनों पर्वों को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ढोल, पारंपरिक अभिवादन और आपसी संवाद ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। यह आयोजन हिंदू धर्म की उस भावना को दर्शाता है, जहाँ पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
होटल रिवरव्यू अपने उत्कृष्ट आतिथ्य, स्वादिष्ट भोजन और पारिवारिक वातावरण के लिए जाना जाता है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से होटल न केवल सामाजिक दायित्व निभा रहा है, बल्कि क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान भी बना रहा है। यदि आप गंगा किनारे स्थित एक भरोसेमंद, स्वच्छ और समारोहों के लिए उपयुक्त होटल की तलाश में हैं, तो होटल रिवरव्यू एक आदर्श विकल्प है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर होटल रिवरव्यू में आयोजित खिचड़ी पार्टी ने मानवीय भावनाओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द को एक साथ पिरोने का सराहनीय कार्य किया। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते हैं और हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाते हैं।
